सुभाषित प्रबोध - यह एक ऐसा संग्रह है जिसमें सुभाषितों (सुविचारों) का ध्यान-पूर्वक चयन किया गया है।प्रत्येक सुभाषित को निम्न प्रकार से प्रस्तुत किया गया है :- स्पष्ट उच्चारणऔर इसमें व्याकरणिक विश्लेषण भी है जैसे :- सरल पदच्छेद- अनुवाद- अन्वय - अर्थात् सुभाषित का गद्य रूप समझाया गया है।यह संग्रह संस्कृत भाषा सीखने वालों को संस्कृत शब्दावली (vocabulary) बढ़ाने में भी सहायता करेगा।प्रत्येक सुभाषित को आकर्षक चित्रों के साथ प्रस्तुत किया गया है, जो इसे हर आयु वर्ग के लिए रोचक बनाता है।एक सुभाषित है:पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलमन्नं सुभाषितम्।मूढै: पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा विधीयते।।इसका अर्थ है - पृथ्वी पर तीन ही रत्न हैं: जल, अन्न और सुभाषित, परन्तु मूर्ख लोग पत्थरों के टुकड़ों को ही रत्न समझ लेते हैं।यह केवल एक संग्रह नहीं है – अपितु यह प्राचीन भारतीय ज्ञान और आज की दुनिया के बीच एक सेतु है। चाहे आप संस्कृत सिख रहें हों या विद्वान हों, इन सुभाषितों से प्राप्त की गयी शिक्षा / सिख आपके दैनिक जीवन में काम आ सकती हैं।सरल व्याख्या और सुंदर चित्रों के साथ यह संग्रह विद्यार्थियों, शिक्षकों और संस्कृत में रुचि रखने वाले सभी लोगों के लिए उपयोगी है।तो आइये, प्राचीन ज्ञान से प्रेरणा लीजिए और संस्कृत सुभाषितों के इस विशेष संग्रह से स्वयं को लाभान्वित करें ।